उत्तराखंड सरकार राज्य के परिवारों का एकीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार करने के लिए देवभूमि परिवार कानून लागू करने की तैयारी में है। इस व्यवस्था के तहत 15 वर्ष या उससे अधिक समय से राज्य में निवास कर रहे परिवारों को योजना के दायरे में लाया जाएगा और प्रत्येक परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि आईडी प्रदान की जाएगी।
कानून के अनुसार परिवार की मुखिया 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे ज्येष्ठ महिला होगी। यदि परिवार में कोई वयस्क महिला नहीं है तो पुरुष को मुखिया माना जाएगा। बाद में परिवार की किसी महिला के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही उसे मुखिया का दर्जा दिया जाएगा।
योजना के प्रभावी संचालन के लिए एक विशेष प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय शासी निकाय इसकी निगरानी और संचालन करेगा।
पारिवारिक सूचनाओं और डिजिटल डाटा की सुरक्षा के लिए कानून में कड़े प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। डाटा चोरी, साइबर घुसपैठ, डाटा सेंटर या सिस्टम में अनाधिकृत प्रवेश तथा वायरस के माध्यम से सिस्टम को नुकसान पहुंचाने जैसे अपराधों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और 10 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान रखा गया है।
सरकार का कहना है कि इस पहल से राज्य के परिवारों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से पात्र लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा।
