गंगोलीहाट महाकाली मंदिर में चातुर्मास अनुष्ठान शुरू, चार माह तक विशेष पूजा-अर्चना और जप-तप का रहेगा क्रम

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गंगोलीहाट। शक्तिपीठ श्री महाकाली (हाटकालिका) मंदिर, गंगोलीहाट में रविवार को आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी से चातुर्मास अनुष्ठान विधिवत प्रारंभ हो गया। मंदिर के मुख्य पुरोहित पंडित पंकज पंत आगामी चार माह तक मंदिर परिसर में ही रहकर विशेष धार्मिक अनुष्ठान, जप, तप, पूजा-पाठ, दान एवं धर्म-कर्म संपन्न करेंगे। इस दौरान उनका परिसर से जाना वर्जित रहेगा । चातुर्मास का समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वादशी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना के साथ होगा।

पंडित पंकज पंत ने बताया कि चातुर्मास सनातन परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक काल माना जाता है। मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की हरिशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थान (प्रबोधिनी) एकादशी को पुनः जागृत होते हैं। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, जबकि जप, तप, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है।

हाटकालिका मंदिर में चातुर्मास अनुष्ठान की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। पंडित पंकज पंत से पहले उनके पिता पंडित पूरन चंद्र पंत तथा उनके दादा व अन्य पूर्वज भी इस परंपरा का निर्वहन करते रहे हैं। लोगो का मानना है कि चातुर्मास के दौरान की गई पूजा-अर्चना और साधना से विशेष आध्यात्मिक फल की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर मंदिर में पुरोहित परिवार ने पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।