धारचूला/पिथौरागढ़। भारत-चीन सीमा से सटे अति संवेदनशील आदि कैलास और ओम पर्वत क्षेत्र में आस्था की आड़ में कथित व्यवसायीकरण और बाहरी हस्तक्षेप को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि गुजरात, दिल्ली और महाराष्ट्र के कुछ लोग आदि कैलास के नाम पर ट्रस्ट बनाकर देशभर से चंदा एकत्र कर रहे हैं, जबकि स्थानीय समुदाय को इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
स्थानीय हक-हकूकधारियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सदियों से इस क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत की रक्षा रं समुदाय करता आया है, लेकिन आदि कैलास के नाम पर गठित कथित ट्रस्टों में समुदाय का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इससे स्थानीय लोगों में ट्रस्टों की कार्यप्रणाली और मंशा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ बाहरी तत्व धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ओम पर्वत क्षेत्र में स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं के विपरीत शिवलिंग स्थापित करने का प्रयास किया गया, जिसे ग्रामीणों के विरोध के बाद रोक दिया गया।
क्षेत्र के हक-हकूकधारियों ने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि आदि कैलास के नाम पर संचालित ट्रस्टों, उनसे जुड़े व्यक्तियों, एकत्रित किए गए चंदे और उनकी गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार की भ्रामक गतिविधि या आर्थिक अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों ने आम श्रद्धालुओं से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी संस्था या ट्रस्ट को आर्थिक सहयोग देने से पहले उसकी वैधता और कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त करें। उनका कहना है कि आदि कैलास और ओम पर्वत क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक स्वरूप और स्थानीय परंपराओं की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
