उत्तराखण्ड के मत्स्य क्षेत्र ने इतिहास रच दिया है। पहली बार राज्य से रेनबो ट्राउट मछली का अंतरराष्ट्रीय निर्यात शुरू हुआ है। पिथौरागढ़ के धारचूला और मुनस्यारी में उत्पादित 5 मीट्रिक टन ट्राउट मछली नेपाल भेजी गई है। इस उपलब्धि को राज्य के मत्स्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आय बढ़ाने के विजन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड ने मत्स्य क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल की है। पशुपालन, मत्स्य एवं दुग्ध विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने वर्चुअल माध्यम से 5 मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली की पहली निर्यात खेप को हरी झंडी दिखाई।
यह मछली पिथौरागढ़ जनपद के धारचूला क्षेत्र के बूंग-बूंग और सिर्खा तथा मुनस्यारी के नामजला क्षेत्र में उत्पादित की गई है। नेपाल को भेजी गई इस पहली खेप से संबंधित मत्स्य उत्पादकों और सहकारी समितियों को करीब 23 लाख रुपये की आय प्राप्त होगी।
मत्स्य विभाग के अनुसार यह सफलता दुबई में आयोजित गुलफूड एक्सपो के दौरान बने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संपर्कों का परिणाम है। विभाग ने निर्यात प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग और परिवहन हेतु 5.40 लाख रुपये की सहायता भी प्रदान की।
मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि उत्तराखण्ड की ट्राउट मछली अपनी गुणवत्ता के दम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष पहचान बना सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नेपाल के बाद अन्य देशों में भी इसकी मांग बढ़ेगी और राज्य के हजारों मत्स्य पालकों को इसका लाभ मिलेगा।
वर्तमान में राज्य के 12 हजार से अधिक मत्स्य पालक इस क्षेत्र से जुड़े हैं। विभाग ने अगले छह माह में नेपाल को 30 मीट्रिक टन ट्राउट मछली निर्यात करने का लक्ष्य रखा है। वहीं, पिछले दो वर्षों में आईटीबीपी और एसएसबी को 45 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति कर 2 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है।
उत्तराखण्ड से ट्राउट मछली का पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात न केवल राज्य के मत्स्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है, बल्कि यह स्थानीय किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजारों में उत्तराखण्ड की नई पहचान भी स्थापित करेगा।
“उत्तराखण्ड की ट्राउट मछली ने पार की सरहद, नेपाल को पहली खेप रवाना”
