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पिथौरागढ़। वर्ष 2019 के बहुचर्चित मारपीट और जातिसूचक टिप्पणी मामले में विशेष सत्र न्यायालय एससी-एसटी, पिथौरागढ़ ने मुनस्यारी के तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान को दोषी करार देते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है। विशेष सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 504 के तहत एक-एक वर्ष के कठोर कारावास, जबकि एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1) के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने तथा धारा 3(2) के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।

अभियोजन के अनुसार पंचायत चुनाव के दौरान 14 अक्टूबर 2019 को थानाध्यक्ष प्रदीप चौहान कैफे संचालक विक्रम सिंह के कैफे पहुंचे थे। बैठने को लेकर विवाद के बाद दोनों के बीच कहासुनी हुई। आरोप है कि बाद में थानाध्यक्ष ने विक्रम सिंह के साथ मारपीट, अभद्रता और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। घटना की शिकायत करने थाने पहुंचे विक्रम सिंह के साथ भी मारपीट और गालीगलौज का आरोप लगाया गया। मामले में 24 नवंबर 2019 को मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने 4 मार्च 2020 को आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। करीब छह वर्ष पांच माह चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 21 अगस्त 2026 को अदालत ने उपलब्ध गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।