जिले में स्थित विश्वविख्यात कैंची धाम की ख्याति देश ही नहीं, विदेशों तक फैली हुई है। हनुमान भक्त नीब करौरी महाराज के इस धाम में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन को पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं में सबसे अधिक संख्या जेन-जी यानी 15 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। पर्यटन विभाग के सहयोग से अर्थ एवं संख्या विभाग द्वारा अगस्त, सितंबर और अक्टूबर 2025 में किए गए सर्वे में यह तथ्य सामने आया है।
सर्वे के अनुसार 67.17 प्रतिशत श्रद्धालु 15 से 30 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जबकि 26.03 प्रतिशत 30 से 45 वर्ष के हैं। कुल श्रद्धालुओं में 79 प्रतिशत पुरुष और 21 प्रतिशत महिलाएं हैं। 95.3 प्रतिशत श्रद्धालु केवल आध्यात्मिक उद्देश्य से कैंची धाम पहुंचे, जिनमें से 40.6 प्रतिशत दूसरी बार दर्शन के लिए आए थे।
सर्वे में पाया गया कि 82.47 प्रतिशत श्रद्धालु उत्तराखंड के बाहर से आए, जबकि 17.33 प्रतिशत स्थानीय थे। सबसे अधिक 29.13 प्रतिशत श्रद्धालु उत्तर प्रदेश से पहुंचे, इसके बाद दिल्ली (13.04%) और बिहार (11.37%) का स्थान रहा। विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या मात्र 0.20 प्रतिशत रही, जिनमें नेपाल और नीदरलैंड के अनुयायी शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 73.40 प्रतिशत श्रद्धालु केवल कैंची धाम तक ही सीमित रहे, जबकि शेष ने नैनीताल, भवाली, भीमताल, मुक्तेश्वर, अल्मोड़ा, कौसानी, जागेश्वर और रानीखेत जैसे पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। 64.77 प्रतिशत श्रद्धालु एक ही दिन में दर्शन कर लौट गए।
हालांकि व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष भी सामने आया। 74 प्रतिशत श्रद्धालु पार्किंग व्यवस्था से, 58 प्रतिशत शौचालय व स्वच्छता से और 54 प्रतिशत कचरा प्रबंधन से असंतुष्ट दिखे। पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर योजनाएं बनाई जा रही हैं और जून से 400 वाहनों की पार्किंग सुविधा शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
कैंची धाम में जेन-जी की आस्था सबसे प्रबल, 95% श्रद्धालु आध्यात्मिक उद्देश्य से पहुंचे
