कुमाऊं में ‘पांडव जागर’ की परंपरा फिर शुरू—चहज गांव में 21 दिवसीय महाभारत गायन से जागृत होते हैं लोकदेवता

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बीडी कसनियाल

पिथौरागढ़- उत्तराखंड की हिमालयी समाजों में ‘भारत’ अथवा ‘महाभारत’ की कथाओं को लोक शैली में गाकर देवताओं को जागृत करने की परंपरा सदियों से जीवित रही है। कुमाऊं और गढ़वाल दोनों क्षेत्रों में प्रचलित यह परंपरा लोक आस्था से जुड़ी है, जिसमें महाभारत की भावनात्मक एवं संवेदनशील कथाओं के गायन के माध्यम से गांव के किसी व्यक्ति में देवभाव उतारा जाता है और लोकदेवता जागृत होते हैं।
पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट उपखंड के चहज गांव में इस वर्ष 21 दिसंबर से शुरू हुआ 21 दिवसीय ‘पांडव जागर’ अनुष्ठान इसी विरासत का हिस्सा है। यह परंपरा 16 वर्षों के अंतराल के बाद पुनः आरंभ हुई है, जिसने बाहर पलायन कर चुके ग्रामीणों को भी अपने सांस्कृतिक मूल से जुड़ने का अवसर दिया है।
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित ग्राम निवासी भूपेश जोशी के अनुसार ‘पांडव जागर’ की शुरुआत नागराज नागर्जुन की पूजा से होती है, जिन्हें महाभारत के अनुसार अर्जुन और नागकन्या उलूपी का पुत्र माना जाता है। बताया जाता है कि उस काल में नागवंशी शासक हिमालयी क्षेत्रों के राजा थे।
इस परंपरा में पांडवों की कथा—पांडवों और कर्ण के जन्म से लेकर उनके जीवन, कर्म और अंत तक की यात्राओं—को लोकधुनों के माध्यम से सुनाया जाता है। आयोजक प्रकाश जोशी ने बताया कि 22 दिनों तक चलने वाले आयोजन में ग्रामसभा के प्रत्येक हिस्से को एक-एक दिन की जिम्मेदारी दी जाती है, जिससे पूरे क्षेत्र की सहभागिता सुनिश्चित होती है।
करीब 500 वर्ष पूर्व गांव में बसने वाले एक जोशी ब्राह्मण परिवार को पांडव पूजा की जिम्मेदारी दी गई थी। मान्यता है कि गांव में एक पवित्र शिला पर गौधारा (गाय का दूध गिरना) देखने के बाद यह शिला पांडवों से संबंधित मानी गई और दिव्य संकेत (‘आकाशवाणी’) प्राप्त होने पर उससे जुड़े अनुष्ठानों की जिम्मेदारी उसी परिवार को दी गई।
ग्रामीण मानते हैं कि महाभारत गाथाओं के भावपूर्ण गायन से ‘नागर्जुन’ देवता जागृत होकर गांव की समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद देते हैं। महाभारत के नायकों—पांडवों—का हिमालय और विशेषकर उत्तराखंड से गहरा संबंध माना जाता है, क्योंकि कथा परंपराओं के अनुसार उन्होंने अपने अंतिम दिन भी यहीं व्यतीत किए। इस प्रकार ‘पांडव जागर’ आज भी हिमालयी सांस्कृतिक आस्था का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।