चाँदपुर गढ़ी उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक दुर्ग रही है। वर्तमान में यह क्षेत्र चमोली जनपद के अंतर्गत आता है। मध्यकालीन गढ़वाल में चाँदपुर गढ़ी न केवल एक मजबूत सैन्य दुर्ग थी, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती थी। यह गढ़ उस दौर की गढ़-राज्य व्यवस्था का सशक्त उदाहरण है, जब पूरा गढ़वाल छोटे-छोटे स्वतंत्र गढ़ों में बंटा हुआ था।
भौगोलिक स्थिति और सामरिक महत्व
चाँदपुर गढ़ी एक ऊँचे पहाड़ी शिखर पर स्थित थी, जहाँ से आसपास की घाटियों, नदी मार्गों और प्रमुख आवागमन रास्तों पर नजर रखी जा सकती थी। इसकी प्राकृतिक दुर्गमता इसे लगभग अभेद्य बनाती थी। यही कारण था कि यह दुर्ग रक्षा के साथ-साथ शासन संचालन के लिए भी एक आदर्श केंद्र माना जाता था।
प्रारंभिक इतिहास और गढ़-राज्य व्यवस्था
मध्यकाल में गढ़वाल क्षेत्र कई छोटे गढ़ों में विभाजित था, जिन पर स्थानीय गढ़पति या सामंत शासन करते थे। चाँदपुर गढ़ी इन्हीं शक्तिशाली गढ़ों में से एक थी, जिसका आसपास के क्षेत्र पर गहरा प्रभाव था। यह गढ़ स्थानीय सत्ता, सैन्य शक्ति और क्षेत्रीय नियंत्रण का प्रतीक रहा है।
पंवार (परमार) वंश का उदय
जब गढ़वाल में पंवार (परमार) वंश का उदय हुआ, तब इन छोटे-छोटे गढ़ों को एकीकृत करने की प्रक्रिया शुरू हुई। पंवार शासकों ने चाँदपुर गढ़ी को अपने अधीन कर इसे गढ़वाल राज्य की संगठित प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था में शामिल किया। इस एकीकरण ने गढ़वाल को एक सशक्त और संगठित राज्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गोरखा आक्रमण और संघर्ष
18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में गोरखाओं ने गढ़वाल पर आक्रमण किया। इस दौरान चाँदपुर गढ़ी ने भी गोरखा सेनाओं का सामना किया। हालांकि अन्य गढ़ों की तरह अंततः यह दुर्ग भी गोरखा शासन के अधीन चला गया। गोरखा काल में इसकी सैन्य उपयोगिता धीरे-धीरे कम होती चली गई।
ऐतिहासिक पतन और वर्तमान स्थिति
ब्रिटिश काल में गढ़वाल की राजनीतिक संरचना में बड़े बदलाव आए। गढ़ों का सैन्य महत्व समाप्त होने लगा और चाँदपुर गढ़ी भी समय के साथ उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में बदल गई। आज इसके बचे हुए अवशेष ही इसके गौरवशाली अतीत की मूक गवाही देते हैं।
ऐतिहासिक महत्व
चाँदपुर गढ़ी का महत्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह—
गढ़वाल की गढ़-राज्य व्यवस्था का प्रतीक है
पंवार वंश के राज्य विस्तार के इतिहास से जुड़ी है
गोरखा आक्रमणों और मध्यकालीन सामरिक रणनीतियों को समझने में सहायक है
चाँदपुर गढ़ी गढ़वाल के मध्यकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह दुर्ग उस समय की राजनीतिक अस्थिरता, सामरिक दूरदर्शिता और स्थानीय शासकों की शक्ति को दर्शाता है। आज भले ही यह गढ़ खंडहर में बदल चुका हो, लेकिन इसके अवशेष गढ़वाल के गौरवशाली अतीत की अमिट कहानी सुनाते हैं।
