टनकपुर–पिथौरागढ़ हाईवे के स्वाला भूस्खलन क्षेत्रसे मिलेगी राहत, मार्च तक बनेंगी 7 सुरक्षा बेंच

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बीडी कसनियाल- टनकपुर–पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित स्वाला भूस्खलन क्षेत्र से शीघ्र ही राहत मिलने की उम्मीद है। चम्पावत जिले के इस संवेदनशील और खतरनाक हिस्से में बार-बार होने वाले भूस्खलन की समस्या से निजात दिलाने के लिए पहाड़ी के ऊपर 7 बेंच (सीढ़ीनुमा कटाव) और कंक्रीट की दीवारों का निर्माण किया जा रहा है। यह कार्य आगामी वर्ष मार्च के पहले सप्ताह तक पूरा कर लिया जाएगा। यह जानकारी जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार ने दी।

जिलाधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित 7 बेंचों में से 2 बेंचों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष 5 बेंचों पर तेजी से काम जारी है। इन बेंचों का उद्देश्य पहाड़ी से नीचे की ओर गिरने वाले मलबे को रोकना और सड़क पर बार-बार होने वाले अवरोध को समाप्त करना है।

स्वाला क्षेत्र लंबे समय से भूस्खलन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। मानसून के दौरान यहां लगातार मलबा गिरने से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस राजमार्ग पर यातायात बार-बार बाधित होता रहा है, जिससे यात्रियों को घंटों तक फंसे रहना पड़ा।

राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग, लोहाघाट के सहायक अभियंता एन.सी. टम्टा ने बताया कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। पहाड़ी के ऊपर 7 बेंचों का निर्माण कर मलबे की स्लाइडिंग को रोका जाएगा। उम्मीद है कि आगामी मानसून में इससे लगातार गिरने वाले मलबे से काफी हद तक राहत मिलेगी।

स्वाला भूस्खलन क्षेत्र उस समय विशेष रूप से चर्चा में आया, जब इसके कारण टनकपुर–पिथौरागढ़ हाईवे बार-बार बंद हुआ और आदि कैलाश यात्रा के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। आदि कैलाश, जो पिथौरागढ़ जिले के धारचूला उपखंड की व्यास घाटी में स्थित है, को वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बढ़ावा दिया गया था। इसे कैलाश मानसरोवर यात्रा के एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने की मंशा है, जो वर्ष 2019 में कोरोना महामारी के बाद से बंद है।

पिथौरागढ़ जिले के सामाजिक कार्यकर्ता एवं होटल व्यवसायी पवन जोशी ने कहा कि यदि स्वाला भूस्खलन क्षेत्र के कारण आदि कैलाश, पंचाचूली, मिलम और हाई हिमालयन मैराथन जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन एवं साहसिक मार्गों पर यातायात प्रभावित होता रहा, तो इससे क्षेत्र की धार्मिक यात्रा और साहसिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रिकॉर्ड 34 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश यात्रा की, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है।

प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को उम्मीद है कि स्वाला भूस्खलन क्षेत्र में चल रहे यह कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्र में यातायात व्यवस्था सुचारु होगी और यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।