पिथौरागढ़। चैत्र माह में मनाए जाने वाले चैतोल पर्व को लेकर नगर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों भारी उत्साह का माहौल बना हुआ है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार बाबा देवलसमेत अपनी 22 बहनों को भिटौला देने निकलते हैं, जिसके तहत बुधवार को विभिन्न गांवों से छात यात्रा शुरू होगी।
मंगलवार को त्रयोदशी के दिन घुनसेरा गांव से भगवती कोटवी और डुंगरी गांव से कालिका माता की छात ढोल-दमाऊं और निशानों के साथ रवाना हुईं। विभिन्न गांवों से होते हुए श्रद्धालु छात लेकर मड़ खड़ायत पहुंचे, जहां विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। इसके बाद छात यात्रा छेड़ा, पतलगांव, चितोली, रोड़ीपाली, उखड़ीसेरी होते हुए बीसाबजेड़ पहुंची।
सभी क्षेत्रों की छातों का सातसिलिंग में मिलन हुआ, जिसके बाद श्रद्धालु अपने मूल स्थानों को लौटे। बुधवार को चतुर्दशी के दिन बिण और चैंसर गांव से बाबा देवलसमेत की छात यात्रा शुरू होगी, जो विभिन्न गांवों में भ्रमण करेगी।
इसके उपरांत बृहस्पतिवार को बिण-चैसर से डोला उठेगा और जाखनी होते हुए चैतोल कुमौड़ के गोरिल मंदिर पहुंचेगा। शाम को नगर के घंटाकरण मंदिर में विभिन्न क्षेत्रों की छातों का भव्य मिलन होगा, जहां परिक्रमा के बाद चैतोल यात्रा अपने-अपने गांवों को प्रस्थान करेगी।
चैतोल पर्व: आज 22 बहनों को भिटौला देने निकलेंगे बाबा देवलसमेत, गूंजे ढोल-दमाऊं
