भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, व पूर्व दर्जा राज्य मंत्री मथुरा दत्त जोशी ने प्रदेश के विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जनपद पिथौरागढ़ की बहुप्रतीक्षित चमगाड़ जल विद्युत परियोजना को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया है।
मथुरा दत्त जोशी ने पत्र के माध्यम से सरकार का ध्यान सरयू नदी की अपार संभावनाओं की ओर खींचते हुए निम्नलिखित बातें साझा कीं:
पुरानी योजना: सरयू नदी के चमगाड़ नामक स्थान पर 120 मेगावाट की यह परियोजना अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय प्रस्तावित की गई थी।
अधूरी प्रक्रिया: सिंचाई विभाग द्वारा इस योजना का प्रारंभिक सर्वे कार्य बहुत पहले पूरा किया जा चुका था, लेकिन राज्य गठन के बाद से यह ठंडे बस्ते में पड़ी है।
जोशी ने कहा कि परियोजना शुरू होने से सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के सैकड़ों स्थानीय बेरोजगार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे।
ऊर्जा संकट का समाधान: इस परियोजना से राज्य को प्रतिवर्ष हजारों मेगावाट अतिरिक्त बिजली प्राप्त होगी, जिससे उत्तराखंड की ऊर्जा स्थिति मजबूत होगी।
प्रदेश प्रवक्ता का वक्तव्य
प्रदेश प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि मथुरा दत्त जोशी ने मुख्यमंत्री से सादर अनुरोध किया है कि जनहित और राज्य के आर्थिक विकास को देखते हुए सिंचाई विभाग, उत्तराखंड को इस परियोजना के निर्माण के संबंध में अविलंब आदेश निर्गत किए जाएं।
पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिले में पलायन एक बड़ी समस्या है। जानकारों का मानना है कि यदि सरयू नदी पर यह 120 मेगावाट की परियोजना धरातल पर उतरती है, तो इससे न केवल स्थानीय बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक कायाकल्प के लिए भी “गेम चेंजर” साबित हो सकती है।
