आज के दौर में बिना किसी तकनीकी टूल के भी AI-जनरेटेड टेक्स्ट की पहचान संभव हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे टेक्स्ट में वाक्य अक्सर समान लंबाई के होते हैं और लेखन में व्यक्तिगत अनुभव या भावनात्मक टोन की कमी दिखाई देती है। भाषा अत्यधिक स्मूद, पॉलिश्ड और संरचनात्मक रूप से परफेक्ट होती है। इसके साथ ही जरूरत से ज्यादा तकनीकी शब्दों और खास तरह के पंक्चुएशन का बार-बार प्रयोग भी संकेत देता है। द हिंदू के मुताबिक, यदि लेख केवल इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध सामान्य जानकारी तक सीमित हो और कोई मौलिक दृष्टिकोण न दे, तो उसके AI-जनरेटेड होने की संभावना अधिक होती है।
बिना टूल के ऐसे पहचानें AI-जनरेटेड टेक्स्ट
