2 जनवरी की प्रमुख घटनाएँ
1954: भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों का आगाज़
भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ और ‘पद्म विभूषण’ पुरस्कारों की स्थापना की। गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा ये सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान और सार्वजनिक सेवा में असाधारण उपलब्धि के लिए दिए जाते हैं।
1973: जनरल मानिक शॉ बने देश के पहले ‘फील्ड मार्शल’
1971 के भारत-पाक युद्ध में ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले जनरल एस. एफ. ए. जे. मानिक शॉ को उनकी वीरता और कुशल नेतृत्व के लिए फील्ड मार्शल के पद से सम्मानित किया गया। वे इस पद को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय सैन्य अधिकारी बने।
1989: रणसिंघे प्रेमदासा ने संभाली श्रीलंका की सत्ता
श्रीलंका के राजनेता रणसिंघे प्रेमदासा ने देश के तीसरे राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वे 1993 तक इस पद पर रहे।
1899: बेलूर मठ बना रामकृष्ण मिशन का स्थायी ठिकाना
स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस के आदेश के बाद साधुओं का समूह कोलकाता स्थित बेलूर मठ में रहने लगा। आज यह रामकृष्ण मठ और मिशन का मुख्यालय है।
2020: अंतरिक्ष में भारत की नई उड़ान, चंद्रयान-3 को मंजूरी
भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर चंद्रयान-3 अभियान को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करना था, जिसे भारत ने बाद में सफलतापूर्वक पूरा किया। इसरो (ISRO) के इस मिशन ने भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया।
[11:11 am, 2/1/2026] Komal Mehta Sir To Point: हेडलाइन:
नए साल की आसमान से सौगात: 3 जनवरी को ‘वुल्फ मून’ और उपसौर की दुर्लभ खगोलीय घटना
नए साल 2026 की शुरुआत एक दुर्लभ खगोलीय घटना के साथ होने जा रही है। 3 जनवरी की रात लगभग 10:45 बजे पूर्णिमा के अवसर पर आसमान में ‘वुल्फ मून’ दिखाई देगा, जो सामान्य से अधिक बड़ा और चमकीला नजर आएगा। इसी के साथ पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट बिंदु पर पहुंचेगी, जिसे खगोल विज्ञान में उपसौर (पेरीहेलियन) कहा जाता है। जनवरी माह में दिखाई देने वाली पूर्णिमा को ‘वुल्फ मून’ नाम दिया जाता है। खगोल प्रेमियों के लिए यह अद्भुत दृश्य रोमांचक अनुभव देगा, जिसे साफ मौसम में नंगी आंखों से भी आसानी से देखा जा सकेगा।
