बसंत पंचमी पर्व के अवसर पर आज हरकी पौड़ी सहित हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कड़ाके की ठंड और रिमझिम बारिश के बीच श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ गंगा स्नान किया। यह इस वर्ष का दूसरा प्रमुख स्नान पर्व रहा, जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
श्रद्धालुओं ने तड़के सुबह से ही गंगा स्नान शुरू कर दिया था। दिनभर हल्की बारिश होती रही, लेकिन मौसम की प्रतिकूलता भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी और स्नान का क्रम लगातार जारी रहा। स्नानार्थियों का कहना है कि जो श्रद्धालु माघ माह में प्रयागराज में संगम स्नान नहीं कर पाए, वे बसंत पंचमी पर हरिद्वार में गंगा स्नान कर समान पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है। ज्ञान, विद्या और कला की देवी सरस्वती की आराधना के लिए श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के साथ-साथ सरस्वती पूजन भी किया। तीर्थ पुरोहित जितेंद्र शास्त्री ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन गंगा स्नान के बाद पंचामृत, फल-फूल आदि से मां सरस्वती की पूजा करने से विद्या, बुद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
गौरतलब है कि बसंत पंचमी का पर्व माघ शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन, ज्ञान, कला और सृजनशीलता का प्रतीक माना जाता है, जो सकारात्मकता और प्रकृति के साथ सामंजस्य की प्रेरणा देता है। हरिद्वार में आज का दृश्य आस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण बना रहा।
