पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में चौथे दिन भी डटे पूर्व सैनिक, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

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130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन के विरोध में सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में पूर्व सैनिक संगठन का क्रमिक धरना चौथे दिन भी जारी रहा। विपरीत मौसम, तेज ठंड और बारिश के बावजूद पूर्व सैनिक पूरे जोश और संकल्प के साथ धरना स्थल पर डटे रहे।

धरने को आज दूरस्थ क्षेत्र देवलथल सहित जनपद के विभिन्न इलाकों से पहुंचे पूर्व सैनिकों और मातृशक्ति का समर्थन मिला। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी। संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यह संघर्ष किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होगा।

पूर्व सैनिक संगठन ने प्रशासन और राज्य सरकार के रवैये को उपेक्षापूर्ण बताते हुए नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पिछले दो महीनों से वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग शासन-प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि जब जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर बात की जाती है तो वे अनभिज्ञता जताते हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों ने कहा कि सीमांत जनपद के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाया जाएगा और इसे जनपद से प्रदेश स्तर तक व्यापक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

संगठन ने दोहराया कि चाहे मौसम कितना भी प्रतिकूल हो या स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयां क्यों न हों, धरना हर हाल में जारी रहेगा। यदि किसी प्रकार का दबाव या बल प्रयोग किया गया तो आंदोलन और अधिक तेज किया जाएगा।

धरने में कैप्टन भगवान सिंह, श्याम गिरी, महेश शाही, दीपक जोशी, आनंद बिष्ट, कृष्णा नेगी (देवलथल), दीपा जोशी सहित दर्जनों पूर्व सैनिक एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे।

पूर्व सैनिक संगठन ने मांग की है कि 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए तथा पिथौरागढ़ के सामरिक और सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।